सव्यंभू ( सिद्धि विनायक) गणेश मंदिर गढ़डोंगरी की महिमा





सव्यंभू गणेश मंदिर गढ़डोंगरी ( सिहावा-नगरी) -

धमतरी जिले मे स्थित स्व्यंभू गणेश मंदिर जो बहुत ही प्राचीन मंदिर है । जिस मंदिर को देखने के लिए दूर - दूर से लोग आते है ,वा जो भी यहा आता है उनका मनोकामना जरूर पूरा होता है । तो आज हम पूरे गणेश मंदिर जी के इतिहास के बारे मे जानेगे वा हमारा एक छोटा सा प्रयास रहा है,आपको इस मंदिर के बारे मे जानकारी बताने का तो चलिए हम चलते है धमतरी जिले के एक छोटे से गाव पर। 

छत्तीसगढ़ की पावन धारा पवित पावनी चित्रोतपल्ला महानदी की तट सप्तऋषियों की तपो भूमि वनोरमा वनों से अच्छादित धमतरी जिला से लगभग 70 किमी  के दूरी पर नगरी ब्लॉक तथा नगरी से 15 किमी के अन्तर्गत ग्राम-गड़डोंगरी मे सव्यंभू गणेश जी की मंदिर स्थित है । 

मंदिर प्रवेश द्वार 

सव्यंभू ( सिद्धि विनायक) गणेश मंदिर की इतिहास - 

हमारे गाव प्रमुख व सियान लोगो के बताए अनुसार लगभग 16 सौ ईश्वी के आसपास ब्रिटीश शासन काल में माल गुजारी प्रथा के प्रचलन था । उस समय व वनसिंग ठाकुर पिता डेरहाराम ठाकुर मालगुजारों का जंगलों में शिकार करना एक प्रकार की शौक था। एक दिन धनघोर जंगलों में जंगली जानवरों का शिकार खेलने पहाड़ी के नीचे अपनी चाकरों सहित शिकार के लिए घात लगा कर जंगल में बैठे थे उसी दौरान चितलों का झुड पानी की तलाश में वही से गुजय निशाना साधे पर निशाना चुक गया और जानवरों के झूठ के पीछे भागते हुए उसकी पैर एक पत्थर से टकराया जिससे उनके अंगुठे का नाखून पैर से अलग हो गया और शिकार करने में असफल हो गया ।
 

खून से ततफत मालगुजार की स्थिति को देखकर उनके साथी अपने गमछा फाडकर उनकी अगूठी में बाधा और उस पत्थर को निकलने की कोशिश किये पत्थर बहुत बड़ा महसूस हुआ जिससे पत्थर नही निकाल पाये और नकाम हो कर घर वापस आये रात्रि में एक भयकर स्वप्न आय जो स्वप्न में एक विशाल श्री गणेश जी की मूर्ति दिखाई दिया और उन्हें स्वप्न में बताया की जिस पत्थर से टकरायें हो वह मेरा रूप है और में ही तुम्हारे पैर के अंगूठे के नाखून को अलग किया हूँ। 

देखो तुम्हारा पैर की नाखून सही सलामत है और स्वप्न टूट गया नींद खुलने के बाद स्वप्न को सोचते हुए अपने पैर को देखा तो बंधी हुई पट्टी निकल आया था । और नाखून भी सही सलामत या आश्यर्च में पढ़ कर रात में फिर सोये नहीं और सुबह अपनी चाकरी के माध्यम से ग्राम के बुर्जुगो को बुला कर अपनी बिती बात सब को सुनाये एवं स्वप्न की बात को बताये उसी दिन कुछ देर बाद ग्राम वासी एवं उनके चाकरी के साथ दल-बल में उस जगह पर गये जहा उन्हें शिकार के दौरान चोट लगी थी उस जगह में पहुंच कर बरिकी से साफ सफाई कर उस पत्थर को बहार निकालने की कोशिश की पर नहीं निकला । 

 उसी दौरान उसके ऊपर का हिस्सा छिल गया कुछ खुदाई स्वप्न के अधार पर उनका रूप झलकने लगा जिसको ग्रामवासीयों को बताया जिसे ग्रामवासी उस जंगल से मूर्ति को गांव के समीप ला कर स्थापित करने का मन बनये थे और पुनः दूसरे दिन सभी आप-पास के ग्रामों को बुलाकर खुदाई करने का विचार लाये उसी रात को मालगुजार को पुनः स्वप्न में बताये की मैं यही रहूँगा मुझ पर किसी प्रकार की छेडाखनी ना कर जिसे स्वप्न की बात को सभी को अवगत करते हुए उस जगह पर जाने के लिए पगदंडी रास्ता एवं उस स्थान पर छाया बनाने का विचार लाये लकडी के खंभों के सहारे एक झोपडी बनाया गया। 

और मालगुजार के व्दारा अपनी रीवाज के अनुसार से प्रथम पुजा अर्चना किया गया जिस दिन से लॉग अपनी मन्नत लेकर पूजा अर्चना करने जाते रहे लोगे में विश्वास पैदा हुए और सोचे की इस जगह पर एक मंदिर बनाया जाये पर उस समय मंदिर नहीं बन पाया और कच्ची ईट एवं कच्ची गारा से चारों तरफ दिवाल खड़ाकर एक कमरे और बैठने के लिए बरसनदा खपरैल ढक कर बनाया गया । 

इसी दिन से ग्रामवासी में लोग पर्व में सम्पुन यज्ञ हवन सब की सहमति से करते आ रहे थे और अपनी मन्नत पूरा करते रहे बुर्जुग वर कहते थे कि एक समय बहुत बड़ा महामारी हमारे सिहावा क्षेत्र में हैजा का बिमारी फैलगया जिससे लोग मयमित होकर बारहपाली के लोग मिलकर भगवान से अर्जी विनती किये और बारहपाली मे उस बिमारी का छाया नहीं पड़ा। 

तब से लोगों में और अधिक विश्वास होने लगा और धीरे - धीरे  लोगों की आवागमन बढ़ते गया फिर भी मंदिर सथल जैसा का तैसा पड़ा रहा एसी समय मालगुजार का मालगुजारी कोई कारण वश टूट गया उसके पश्चात अमय राम डोटे मानगुजार का शासन ग्राम गढ़डोगरी में चलने लगा उसी दरख्यान श्री गणेश जी की पूजा अर्चना के लिए पुजारी पुरोहित भगवान प्रसाद पाण्डेय भट्टीगढ़ मैनपुर से लया गया इस प्रकार श्री गणेश जी का पूजा अर्चना चलता रहा। 


गणेश जी मंदिर का निर्माण -

वर्ष 1991 में ग्रामीण जनताओं एवं जनसहयोग से श्री गणेश जी स्थल में पक्की मकान निर्माण किया है व ध्रुव समाज भाईयों व्दारा जय बुडादेव मंदिर निर्माण एवं वर्ष 2006 में माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह व्दारा घोषणा से सामुदायिक भवन निर्माण गांव के जनसहयोग से ज्योति कलश भवन निर्माण किया गया है।

गणेश मंदिर पर स्थित आम के पेड़ पर साँप और मेढक का रहना चमत्कारिक घटना -

यहाँ नवरात्रि पर्व में श्रावण मास में  सर्प आते है और उदगम स्थल पर लगा हुआ आम के वृक्ष में निवास करते हैं इस चमत्कारिक घटना को अनेक लोगों ने देखा है इस नाग सर्प के साथ उनके भोजन एक मेढकमी भी साथ में रहता है इस वर्ष मंदिर के एक कोने से पोला के आसपास से जलघरा निकल कर श्री गणेश भगवान की घरण घुलाकर कुंड में जाती है और कुंड मर जाती है।
 अनंत चतुदर्शी के आसपास जल आना बंद हो जाती है कुडं की जल को कई ग्रामीण गंगाजल के रूप में ले जाकर अपने घर में पूजा पाठ कर रखने लगे एवं घर में छिडकाव करने लगे जिससे घर परिवार को विघ्नवांधा दूर होता गया वह साक्षत प्रमाण है।

 देवी देवताओं का गढ़ गढ़डोंगरी -

श्री गणेश जी मंदिर के पिछे पहाडी के चारों ओर देवी देवताओं का गढ़ है व विशाल अनेक गुफाऐं है जहां पूर्व में ऋषि मुनियों का गढ़ माना जाता है। जहा कई देवी - देवताओ का स्थान फिर भी कई लोगो को अब तक की इनकी जानकारी नही हो पाया है । 

गढ़डोंगरी  गाँव का नामकरण - 

गाँव का नामकरण से मत है की ,जिस पहाड़ के नीचे स्व्यम गणेश जी विराजमान है अर्थात गणेश जी का मंदिर है जिनके नाम से गाँव का नाम का पड़ा गद्दोंगरी वो सही मे ही(गणडोंगरी) गणेश जी का डोंगरी (पर्वत ) है । 


लेकिन बोल चल के भाषा मे गद्दोंगरी हुआ है और आज भी इस गाव को गणेश जी के नाम से जाना जाता है । व गणेश मंदिर धमतरी जिले के प्रमुख धार्मिकस्थल मे से एक है । साथ ही यहा दर्शन करने के लिए साल भर मे हजारो श्रद्धालु आते है ।

गणेश मंदिर के साथ ही बहुत सारे देवी – देवताओ का मंदिर –

गणेश जी के मदिर के साथ की मंदिर के आस पास बहुत सारे देवी- देवताओ के दर्शन करने को मिलेंगे जैसे -
बूढ़ादेव मंदिर


माँ शेरवाली मंदिर


लक्ष्मीनारायण  मंदिर
 
शिवजी मंदिर

हनुमानजी मंदिर
हनुमानजी मंदिर ,नागदेव की स्थान, शनिदेव महराज के साथ के पर्वत ऊपर माँ मावली माँ की गुफा , गर्ग ऋषि की तपस्यास्थल के साथ ही पूरे पर्वत पर ही बहुत सारे देवी- देवता का मंदिर व स्थान है । 

संध्या महाआरती के समय पर जामवंत जी महाराज का दर्शन - 

जब सव्यंभू गणेश मंदिर मे संध्या के समय गणेश जी का महारती व पुजा आर्चना होती है तभी कुछ क्षण पश्चात इस मंदिर पर भालू पहाड़ पर से अपने गुफा से निकलकर गणेश जी के मंदिर आते है व दर्शन व प्रशाद पाकर कर व लोगो को दर्शन देकर वापस अपने गुफा की और चले जाता है। लोगो का मानना है की सव्यं जामवंत जी महराज है और गणेश जी के मंदिर मे आकर के लोगो को दर्शन देते हैं । व कई पर्व जैसे नवरात्रि गणेश चतुर्थी व कई सारे पर्व मे जब मंदिर पर भजन होता है तो उस समय मंदिर पर देखने लायक रहता है । आप संध्या के समय पर जरूर आओ आपको जामवंत जी महराज के दर्शन होंगे ही ।

मनोकामनए जरूर पृर्ण करते है गणेश जी –

सव्यंभू गणेश मंदिर मे जब भी कोई भक्त आता है, व यहा से कोई भी संकल्प करके जाता है तो उनकी मनोकामनए पूर्ण होता ही है। येशी मान्यतया है गणेश जी का इसलिए दूर – दूर से लोग यहा दर्शन करने के लिए आते है ।

गद्दोंगरी का साप्ताहिक बाज़ार – 

गद्दोंगरी का बाज़ार आपको पता ही होगा, साप्ताहिक बाज़ार लगता जो सोमवार के दिन लगता है। जहा आस- पास के है सारे गाव के लोग साग- सब्जी व कई सारे घर की जरूरत की वस्तु लेने के लिए आते है जैसे गाँव है- जरहीडही,गोहानपरा,गिधावा,नवापरा, लतियारा,नाचकारपारा,चर्रा,दोहलापरा व और गाव के लोग बाज़ार आते है ।

शीतला माता मंदिर गढ़डोंगरी -
शीतला माता की मंदिर भी है जो आस पास के ग्रामो की देवी है तथा जिनकी महिमा दूर - दूर तक है , माता की कथा आपको कुछ ही दिन मे पढ़ने को मिलेगा -






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